☀Divyakaal
जय अहोई माता — अहोई माता की आरती
🪔 आरती · अहोई माता

जय अहोई माता — अहोई माता की आरती

अहोई अष्टमी पर माता के पूजन और व्रत-कथा के पश्चात श्रद्धापूर्वक यह आरती गाएँ। दीपक की ज्योति के साथ माता का स्मरण करें और संतान के आरोग्य, दीर्घायु तथा परिवार के मंगल की प्रार्थना करें।

पाठ स्रोत: DivyaKaal
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जय अहोई माता — अहोई माता की आरती

जय अहोई माता, जय अहोई माता। तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता॥ जय अहोई माता॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला तू ही है जगमाता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता॥ जय अहोई माता॥

माता रूप निरंजन सुख-सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता॥ जय अहोई माता॥

तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता। कर्म-प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता॥ जय अहोई माता॥

जिस घर थारो वासा वाहि में गुण आता। कर न सके सोई कर ले मन नहीं धड़काता॥ जय अहोई माता॥

तुम बिन सुख न होवे न कोई पुत्र पाता। खान-पान का वैभव तुम बिन नहीं आता॥ जय अहोई माता॥

शुभ गुण सुंदर युक्ता क्षीर निधि जाता। रतन चतुर्दश तोकू कोई नहीं पाता॥ जय अहोई माता॥

श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता। उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता॥ जय अहोई माता॥

॥ इति ॥

मूल पाठ: DivyaKaal

जय अहोई माता — अहोई माता की आरती — भावार्थ

इस आरती में अहोई माता को जगमाता तथा सुख, संपत्ति और मंगल की दात्री कहकर वंदन किया गया है। ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला के रूपों में उनकी महिमा गाई गई है। भक्त माता के सान्निध्य से घर में सद्गुण, मन में निर्भयता और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करता है। अंत में माता की आरती गाते हुए हृदय में आनंद और अंतःकरण की शुद्धि का भाव प्रकट किया गया है।

आरती का क्रम

अहोई माता का पूजन और व्रत-कथा पूर्ण करके दीपक प्रज्वलित करें। परिवार सहित माता के सम्मुख बैठकर आरती गाएँ। प्रत्येक पद के बाद “जय अहोई माता” का टेक दोहराएँ। अंत में माता को प्रणाम करके संतान और परिवार के मंगल की प्रार्थना करें।

आरती के पश्चात

आरती की ज्योति श्रद्धापूर्वक ग्रहण करें। अपने कुलाचार के अनुसार तारों अथवा चंद्रमा को अर्घ्य दें और प्रसाद ग्रहण करके व्रत पूर्ण करें। विस्तृत पूजा-विधि, व्रत-कथा और सामग्री सूची अहोई अष्टमी से जुड़े पृष्ठों पर पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहोई माता की आरती कब करें?

अहोई अष्टमी के पूजन में माता की पूजा और व्रत-कथा के पश्चात आरती करें।

इस आरती में कितने पद हैं?

यहाँ आठ पद दिए गए हैं। प्रत्येक पद के बाद “जय अहोई माता” का टेक है।

क्या परिवार सहित आरती गा सकते हैं?

हाँ, परिवार सहित शांत और श्रद्धापूर्ण भाव से माता की आरती गाएँ और संतानों के मंगल की प्रार्थना करें।

अहोई माता हमारी संतानों पर कृपा बनाए रखें और प्रत्येक घर में सुख, सद्भाव तथा मंगल का प्रकाश करें। जय अहोई माता!