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श्री रामचंद्र जी की आरती — आरती कीजै श्री रघुवर जी की
🪔 आरती · श्रीराम

श्री रामचंद्र जी की आरती — आरती कीजै श्री रघुवर जी की

श्री रामचंद्र जी की आरती प्रभु श्रीराम के करुणामय, मर्यादापूर्ण और भक्तवत्सल स्वरूप का गुणगान है। इसमें दशरथ और कौशल्या के पुत्र राम को समस्त जगत के आश्रय के रूप में स्मरण किया गया है। दैनिक पूजा हो या राम नवमी का उत्सव, इस आरती के साथ आप प्रभु के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त कर सकते हैं।

पाठ स्रोत: लोकप्रचलित श्रीराम आरती
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श्री रामचंद्र जी की आरती — आरती कीजै श्री रघुवर जी की

आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥

दशरथ तनय कौशल्या नन्दन, सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥ अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन, मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥

निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि, सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥ हरण शोक-भय दायक नव निधि, माया रहित दिव्य नर वर की॥

जानकी पति सुर अधिपति जगपति, अखिल लोक पालक त्रिलोक गति॥ विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति, एक मात्र गति सचराचर की॥

शरणागत वत्सल व्रतधारी, भक्त कल्प तरुवर असुरारी॥ नाम लेत जग पावनकारी, वानर सखा दीन दुख हर की॥

॥ इति ॥

मूल पाठ: लोकप्रचलित श्रीराम आरती

श्री रामचंद्र जी की आरती — आरती कीजै श्री रघुवर जी की — भावार्थ

आरती के आरंभ में रघुकुल के श्रेष्ठ श्रीराम की वंदना की गई है। उन्हें सत्य, चेतना और आनंद से पूर्ण, कल्याणकारी तथा सुंदर कहा गया है। आगे वे दशरथ के पुत्र और माता कौशल्या के आनंद के रूप में स्मरण किए जाते हैं। देवताओं और मुनियों की रक्षा तथा अधर्म का नाश करने वाले राम भक्तों के हृदय को चंदन जैसी शीतलता देते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम नाम उनके आदर्श आचरण को सामने रखता है। फिर आरती उनके निर्गुण और सगुण, दोनों स्वरूपों का वर्णन करती है। समस्त लोक उनकी वंदना करते हैं; भक्त उन्हें शोक और भय हरने वाला तथा समृद्धि का आश्रय मानते हैं।

इसके बाद श्रीराम को जानकी के पति, जगत के स्वामी और तीनों लोकों के पालनकर्ता के रूप में प्रणाम किया गया है। उनकी महिमा अपरिमित है और वे समस्त चराचर के आश्रय हैं। अंतिम भाग में शरण लेने वालों के प्रति उनका स्नेह और संकल्प में उनकी दृढ़ता उभरती है। भक्तों के लिए वे कल्पवृक्ष जैसे कृपालु हैं। उनका नाम पवित्रता का स्मरण कराता है; वानरों से उनकी मित्रता और दुखियों के प्रति करुणा प्रभु की आत्मीयता को प्रकट करती है।

श्रीराम की आरती कब करें

श्रीराम की आरती प्रातः और संध्या की पूजा के अंत में की जाती है। राम नवमी, विजयादशमी, सुंदरकांड, रामायण-पाठ तथा अन्य शुभ अवसरों पर भी यह आरती गाई जाती है। नित्य पूजा में श्रद्धापूर्वक इसका गायन करें और प्रभु के चरणों में अपना प्रेम व समर्पण अर्पित करें।

आरती की सरल विधि

पूजा-स्थान स्वच्छ करें और श्री सीताराम, लक्ष्मणजी तथा हनुमानजी का ध्यान करें। प्रभु को चंदन, पुष्प और यथाशक्ति नैवेद्य अर्पित करें। आरती की थाली में घी का दीपक जलाकर श्रीराम के सम्मुख आरती गाएँ। दीपक को अपनी ओर से देखते हुए घड़ी की दिशा में धीरे-धीरे घुमाएँ। घंटी मधुर स्वर में बजाएँ और मन को प्रभु के मंगलमय स्वरूप में लगाएँ। थाली स्थिर रखें तथा लौ को वस्त्र और पुष्प-सज्जा से दूर रखें।

आरती का भक्तिभाव

आरती का दीप प्रभु के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और आत्मसमर्पण का प्रतीक है। श्रीराम का स्मरण करते हुए सत्य, करुणा, मर्यादा और कर्तव्यपालन को जीवन में धारण करने की प्रार्थना करें। उनकी शरणागतवत्सलता भक्त को विश्वास देती है और वानर-सखा का स्वरूप उनकी आत्मीयता का स्मरण कराता है।

आरती के बाद

आरती पूर्ण होने पर दीप की ऊष्मा को हथेलियों से ग्रहण करके मस्तक से लगाएँ और प्रभु को प्रणाम करें। नैवेद्य का प्रसाद उपस्थित भक्तों में बाँटें। अंत में श्रद्धापूर्वक जयघोष करें—सियावर रामचंद्र की जय! दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और उसके जलते रहने तक ध्यान रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री रामचंद्र जी की आरती किसकी स्तुति है?

यह आरती भगवान श्रीराम की स्तुति है। इसमें उन्हें रघुवर, दशरथ के पुत्र, कौशल्या के आनंद, जानकी के पति और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में स्मरण करते हुए उनकी करुणा तथा भक्तवत्सलता का गुणगान किया गया है।

श्रीराम को रघुवर क्यों कहा जाता है?

रघुवर का अर्थ है रघुकुल में श्रेष्ठ। श्रीराम राजा रघु के वंश से संबंधित माने जाते हैं। इस संबोधन में उनके वंश का सम्मान और उनके आदर्श चरित्र के प्रति भक्त का प्रेम, दोनों प्रकट होते हैं।

क्या श्री रामचंद्र जी की आरती रोज गा सकते हैं?

हाँ, आप अपनी दैनिक पूजा में यह आरती गा सकते हैं। सुबह या संध्या में सुविधाजनक समय चुनें और शांत मन से प्रभु का स्मरण करें। घर की चली आ रही पूजा-पद्धति के अनुसार इसे पूजा के अंत में स्थान दे सकते हैं।

राम नवमी और दशहरा पर श्रीराम की आरती कब करें?

इन उत्सवों पर श्रीराम की पूजा के समापन में आरती की जाती है। स्थानीय मंदिर और पारिवारिक परंपरा के अनुसार आयोजन का क्रम अलग हो सकता है। इस वर्ष की तिथि और मुहूर्त के लिए DivyaKaal का संबंधित त्योहार पृष्ठ देखें।

श्रीराम के करुणामय स्वरूप का स्मरण करें और उनकी मर्यादा को अपने आचरण में स्थान दें।