DivyaKaal

दिव्य समय, शुभ जीवन

क्षणिक वैदिक चार्ट

लग्न कुंडली

चुने हुए समय पर लग्न और भावों में ग्रहों की सटीक स्थिति

लग्नवृश्चिक17°45'
नई दिल्ली2028-09-19 · 12:00
लाहिड़ी अयनांश · निरयन राशि
8वृश्चिक
9धनुराहु 25°22' ℞
10मकर
11कुंभ
12मीन
1मेषशनि 16°24' ℞
2वृषभ
3मिथुनकेतु 25°22' ℞
4कर्कमंगल 14°55'शुक्र 20°34'
5सिंह
6कन्यासूर्य 2°35'चंद्र 9°49' †बुध 24°19'गुरु 11°11' †
7तुला
दिव्यकाल स्वचालित विश्लेषण

लग्न शुद्धि एवं विश्लेषण

वृश्चिक लग्न · 17°45'लग्नेश मंगल · 9वाँ भाव · अष्टम में ग्रह
वर्जित
  1. सर्वोत्तम
  2. उत्तम
  3. दोष युक्त
  4. वर्जित
  • अष्टम शुद्धि दोष

    8वें भाव में पाप ग्रह केतु (नीच) — अष्टम शुद्धि भंग।

  • लग्नेश सावधानी

    लग्नेश मंगल 9वें भाव में, नीच — केंद्र/त्रिकोण में, शुभ।

  • चंद्र स्थिति ध्यान दें

    चंद्र 11वें भाव में, पर क्षीण (सूर्य से 7°)।

  • गुरु दृष्टि ध्यान दें

    गुरु 11वें भाव में — लग्न पर गुरु की दृष्टि नहीं।

  • अंश / संधि शुद्ध

    17°45' — मध्य अंश, संधि या गंडांत दोष नहीं।

  • कर्तरी दोष शुद्ध

    पाप कर्तरी दोष नहीं।

  • लग्न में ग्रह शुद्ध

    लग्न पाप ग्रहों से मुक्त।

  • ग्रह विन्यास शुद्ध

    केंद्र/त्रिकोण में शुभ ग्रह: शुक्र · 3/6/11 में पाप ग्रह (शुभ): सूर्य, शनि।

सरल निष्कर्ष

इस समय का लग्न शुभ कार्यों के लिए त्याज्य है। समय आगे-पीछे करके अगला शुद्ध लग्न देखें।

आचार्य हेतु — नियम और सीमाएँ
  • लग्न संधि: पहला या अंतिम 1° त्याज्य; जल-अग्नि राशि की संधि पर गंडांत। 28°–2° के पास सावधानी।
  • अष्टम शुद्धि: 8वाँ भाव खाली हो। पाप ग्रह हो तो दोष; स्वगृही/उच्च हो तो शमन।
  • पाप कर्तरी: 12वें और 2रे दोनों में पाप ग्रह। लग्न पर गुरु दृष्टि (गुरु 1/5/7/9 में) हो तो परिहार।
  • चंद्र: 6/8/12 भाव त्याज्य; 6/12 में गुरु केंद्र-त्रिकोण में हो तो परिहार। सूर्य से 72° से कम पर क्षीण।
  • लग्नेश केंद्र-त्रिकोण में शुभ; दुःस्थान में दोष, नीच हो तो त्याज्य।
  • शुभ ग्रह केंद्र-त्रिकोण में और पाप ग्रह 3/6/11 में शुभ; केंद्र (4/7/10) में पाप ग्रह दोष।

ध्यान दें: यह केवल लग्न शुद्धि है, पूर्ण मुहूर्त नहीं। शुभ मुहूर्त में तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, चंद्र-तारा बल, भद्रा और कार्य-विशेष के नियम भी देखे जाते हैं। यदि आप ज्योतिष के जानकार नहीं हैं, तो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले अपने पंडित या पुरोहित से परामर्श अवश्य करें, और इस लग्न शुद्धि को साथ रखकर शुद्ध एवं शुभ मुहूर्त निश्चित करें।

दिव्यकाल व्यक्तिगत शुभ मुहूर्तआपके कार्य, स्थान और जन्म राशि-नक्षत्र के अनुसार 40 से अधिक दोषों की जाँच, फिर आचार्य मंडल की समीक्षा। मुहूर्त 24 घंटे के भीतर।मुहूर्त अनुरोध करें

ग्रह स्थिति

☀️
सूर्यकन्या (6) · 2°35'उत्तराफाल्गुनी · पद 2
🌙
चंद्रकन्या (6) · 9°49'उत्तराफाल्गुनी · पद 4सूर्य-दूरी: 7.23°
अंशगत अस्त
♂️
मंगलकर्क (4) · 14°55'पुष्य · पद 4सूर्य-दूरी: 47.66°
☿
बुधकन्या (6) · 24°19'चित्रा · पद 1सूर्य-दूरी: 21.73°
♃
गुरुकन्या (6) · 11°11'हस्त · पद 1सूर्य-दूरी: 8.61°
अंशगत अस्त
♀️
शुक्रकर्क (4) · 20°34'अश्लेषा · पद 2सूर्य-दूरी: 42.01°
♄
शनिमेष (1) · 16°24'भरणी · पद 1सूर्य-दूरी: 136.18°
℞ वक्री
☊
राहुधनु (9) · 25°22'पूर्वाषाढ़ा · पद 4
℞ वक्री
☋
केतुमिथुन (3) · 25°22'पुनर्वसु · पद 2
℞ वक्री

चार्ट में अंक राशि संख्या हैं: मेष 1 से मीन 12। ℞ वक्री और † अंशगत अस्त दर्शाता है। शुक्र: मार्गी 10°, वक्री 8°; गुरु: 11° सूर्य-दूरी। स्थानानुसार तारा-अस्त/उदय की दृश्यता तिथियाँ अलग हो सकती हैं।