पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- वार ध्यान दें
रविवार — राजकीय, चिकित्सा व अग्नि संबंधी कार्यों में शुभ; मांगलिक कार्यों में मध्यम।
- तिथि शुद्ध
कृष्ण सप्तमी (भद्रा) — शुभ तिथि। 2:52 अपराह्न के बाद अष्टमी।
- नक्षत्र शुद्ध
पुष्य — क्षिप्र (लघु) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — कल, 4:30 पूर्वाह्न तक, फिर आश्लेषा।
- योग शुद्ध
साध्य — शुभ योग — 2:39 अपराह्न तक, फिर शुभ।
- करण शुद्ध
बव — चर करण, शुभ — 2:52 अपराह्न तक, फिर बालव।
- विशेष शुभ योग शुद्ध
सर्वार्थ सिद्धि योग (6:06 पूर्वाह्न – कल, 4:30 पूर्वाह्न) · रवि पुष्य योग (6:06 पूर्वाह्न – कल, 4:30 पूर्वाह्न)।
- अशुभ योग शुद्ध
दग्ध या यमघंट योग नहीं।
- भद्रा शुद्ध
आज भद्रा नहीं।
- पंचक शुद्ध
पंचक नहीं।
- मास शुद्ध
आश्विन मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज का पंचांग शुद्ध है और विशेष सिद्ध योग भी बन रहा है। नया कार्य, पूजा-अनुष्ठान, खरीदारी और अन्य शुभ कार्यों के लिए दिन अत्यंत अनुकूल है — राहुकाल आदि का समय छोड़कर।
दिन की समय-रेखा
- सर्वार्थ सिद्धि योग6:06 पूर्वाह्न – कल, 4:30 पूर्वाह्नसिद्ध योग
- रवि पुष्य योग6:06 पूर्वाह्न – कल, 4:30 पूर्वाह्नसिद्ध योग
- अभिजित मुहूर्त11:17 पूर्वाह्न – 12:05 अपराह्नशुभ
- यमगंड11:41 पूर्वाह्न – 1:04 अपराह्नसावधानी
- वर्ज्यम्1:17 अपराह्न – 2:53 अपराह्नसावधानी
- गुलिक काल2:28 अपराह्न – 3:52 अपराह्नसावधानी
- राहुकाल3:52 अपराह्न – 5:16 अपराह्नत्याज्य
- अमृत कालकल, 3:25 पूर्वाह्न – कल, 5:01 पूर्वाह्नशुभ
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 4:31 पूर्वाह्न – कल, 5:19 पूर्वाह्नशुभ
- साध्य → शुभ2:39 अपराह्नपरिवर्तन
- सप्तमी → अष्टमी2:52 अपराह्नपरिवर्तन
- पुष्य → आश्लेषाकल, 4:30 पूर्वाह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 6:06 पूर्वाह्न – 11:41 पूर्वाह्न