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दिव्यकाल स्वचालित विश्लेषण

पंचांग शुद्धि

दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में

05-12-2026 · शनिवार · टोरंटो
सूर्योदय कालीन पंचांग के आधार पर

पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण

कार्तिक कृष्ण द्वादशी · शनिवारस्वाति नक्षत्र · शोभन योग · तैतिल करणपरिहार: सर्वार्थ सिद्धि योग
दोष युक्त · परिहार सहित
  1. सर्वोत्तम
  2. उत्तम
  3. दोष युक्त
  4. वर्जित
  • वार सावधानी

    शनिवार — क्रूर वार — विवाह, गृह-प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों में त्याज्य।

  • तिथि शुद्ध

    कृष्ण द्वादशी (भद्रा) — शुभ तिथि। 2:22 अपराह्न के बाद त्रयोदशी।

  • नक्षत्र शुद्ध

    स्वाति — चर (चल) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — कल, 3:08 पूर्वाह्न तक, फिर विशाखा।

  • योग शुद्ध

    शोभन — शुभ योग — 9:11 अपराह्न तक, फिर अतिगण्ड।

  • करण शुद्ध

    तैतिल — चर करण, शुभ — 2:22 अपराह्न तक, फिर गर।

  • विशेष शुभ योग शुद्ध

    सर्वार्थ सिद्धि योग (7:37 पूर्वाह्न – कल, 3:08 पूर्वाह्न)।

  • अशुभ योग शुद्ध

    दग्ध या यमघंट योग नहीं।

  • भद्रा शुद्ध

    आज भद्रा नहीं।

  • पंचक शुद्ध

    पंचक नहीं।

  • मास शुद्ध

    कार्तिक मास — खरमास या अधिक मास नहीं।

सरल निष्कर्ष

आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

दिन की समय-रेखा

  • गुलिक काल7:37 पूर्वाह्न – 8:44 पूर्वाह्नसावधानी
  • वर्ज्यम्7:37 पूर्वाह्न – 8:56 पूर्वाह्नसावधानी
  • सर्वार्थ सिद्धि योग7:37 पूर्वाह्न – कल, 3:08 पूर्वाह्नसिद्ध योग
  • राहुकाल9:52 पूर्वाह्न – 11:00 पूर्वाह्नत्याज्य
  • अभिजित मुहूर्त11:44 पूर्वाह्न – 12:32 अपराह्नशुभ
  • यमगंड1:15 अपराह्न – 2:23 अपराह्नसावधानी
  • अमृत काल5:40 अपराह्न – 7:16 अपराह्नशुभ
  • ब्रह्म मुहूर्तकल, 6:02 पूर्वाह्न – कल, 6:50 पूर्वाह्नशुभ
  • द्वादशी → त्रयोदशी2:22 अपराह्नपरिवर्तन
  • शोभन → अतिगण्ड9:11 अपराह्नपरिवर्तन
  • स्वाति → विशाखाकल, 3:08 पूर्वाह्नपरिवर्तन

दिन के शुद्ध समय-खंड

सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।

  • 8:56 पूर्वाह्न – 9:52 पूर्वाह्नद्वादशीसिद्ध योग
  • 11:00 पूर्वाह्न – 1:15 अपराह्नद्वादशीअभिजितसिद्ध योग
  • 2:23 अपराह्न – 4:39 अपराह्नत्रयोदशीसिद्ध योग