पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- भद्रा सावधानी
मृत्युलोक (पृथ्वी) की भद्रा 7:35 पूर्वाह्न – 12:34 अपराह्न — इस अवधि में शुभ कार्य न करें।
- करण ध्यान दें
विष्टि — विष्टि (भद्रा) करण, भद्रा अनुभाग देखें — 12:34 अपराह्न तक, फिर बव।
- विशेष शुभ योग ध्यान दें
आज सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि या रवि योग जैसा कोई विशेष योग नहीं।
- तिथि शुद्ध
कृष्ण दशमी (पूर्णा) — शुभ तिथि। 12:34 अपराह्न के बाद एकादशी।
- वार शुद्ध
गुरुवार — सौम्य वार, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
- नक्षत्र शुद्ध
हस्त — क्षिप्र (लघु) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — 11:52 अपराह्न तक, फिर चित्रा।
- योग शुद्ध
आयुष्मान — शुभ योग — 9:53 अपराह्न तक, फिर सौभाग्य।
- अशुभ योग शुद्ध
दग्ध या यमघंट योग नहीं।
- पंचक शुद्ध
पंचक नहीं।
- मास शुद्ध
कार्तिक मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।
दिन की समय-रेखा
- यमगंड7:34 पूर्वाह्न – 8:42 पूर्वाह्नसावधानी
- भद्रा (पृथ्वी)7:35 पूर्वाह्न – 12:34 अपराह्नत्याज्य
- वर्ज्यम्7:38 पूर्वाह्न – 9:14 पूर्वाह्नसावधानी
- गुलिक काल9:50 पूर्वाह्न – 10:58 पूर्वाह्नसावधानी
- अभिजित मुहूर्त11:42 पूर्वाह्न – 12:30 अपराह्नशुभ
- राहुकाल1:14 अपराह्न – 2:22 अपराह्नत्याज्य
- अमृत काल5:38 अपराह्न – 7:14 अपराह्नशुभ
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 6:00 पूर्वाह्न – कल, 6:48 पूर्वाह्नशुभ
- दशमी → एकादशी12:34 अपराह्नपरिवर्तन
- आयुष्मान → सौभाग्य9:53 अपराह्नपरिवर्तन
- हस्त → चित्रा11:52 अपराह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 12:34 अपराह्न – 1:14 अपराह्न
- 2:22 अपराह्न – 4:39 अपराह्न