पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- अशुभ योग सावधानी
दग्ध योग (वार-तिथि) — सर्वार्थ सिद्धि योग से परिहार।
- वार ध्यान दें
रविवार — राजकीय, चिकित्सा व अग्नि संबंधी कार्यों में शुभ; मांगलिक कार्यों में मध्यम।
- पंचक ध्यान दें
अग्नी पंचक चल रहा है — दक्षिण दिशा यात्रा, छत डालना, लकड़ी संग्रह आदि टालें।
- तिथि शुद्ध
शुक्ल द्वादशी (भद्रा) — शुभ तिथि। 10:26 पूर्वाह्न के बाद त्रयोदशी।
- नक्षत्र शुद्ध
रेवती — मृदु (मैत्र) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — 11:24 पूर्वाह्न तक, फिर अश्विनी।
- योग शुद्ध
सिद्धि — शुभ योग — 8:00 पूर्वाह्न तक, फिर व्यतीपात।
- करण शुद्ध
बालव — चर करण, शुभ — 10:26 पूर्वाह्न तक, फिर कौलव।
- विशेष शुभ योग शुद्ध
सर्वार्थ सिद्धि योग (11:24 पूर्वाह्न – कल, 5:40 पूर्वाह्न)।
- भद्रा शुद्ध
आज भद्रा नहीं।
- मास शुद्ध
कार्तिक मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।
दिन की समय-रेखा
- अमृत काल9:06 पूर्वाह्न – 10:42 पूर्वाह्नशुभ
- सर्वार्थ सिद्धि योग11:24 पूर्वाह्न – कल, 5:40 पूर्वाह्नसिद्ध योग
- अभिजित मुहूर्त12:17 अपराह्न – 1:05 अपराह्नशुभ
- यमगंड12:41 अपराह्न – 2:26 अपराह्नसावधानी
- गुलिक काल4:11 अपराह्न – 5:56 अपराह्नसावधानी
- राहुकाल5:56 अपराह्न – 7:41 अपराह्नत्याज्य
- वर्ज्यम्11:53 अपराह्न – कल, 1:29 पूर्वाह्नसावधानी
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 4:04 पूर्वाह्न – कल, 4:52 पूर्वाह्नशुभ
- सिद्धि → व्यतीपात8:00 पूर्वाह्नपरिवर्तन
- द्वादशी → त्रयोदशी10:26 पूर्वाह्नपरिवर्तन
- रेवती → अश्विनी11:24 पूर्वाह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 5:41 पूर्वाह्न – 12:41 अपराह्न
- 2:26 अपराह्न – 4:11 अपराह्न