पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- भद्रा सावधानी
मृत्युलोक (पृथ्वी) की भद्रा कल, 4:17 पूर्वाह्न – कल, 6:52 पूर्वाह्न — इस अवधि में शुभ कार्य न करें।
- वार ध्यान दें
रविवार — राजकीय, चिकित्सा व अग्नि संबंधी कार्यों में शुभ; मांगलिक कार्यों में मध्यम।
- तिथि शुद्ध
कृष्ण षष्ठी (नंदा) — शुभ तिथि। कल, 4:17 पूर्वाह्न के बाद सप्तमी।
- नक्षत्र शुद्ध
पुष्य — क्षिप्र (लघु) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — 1:29 अपराह्न तक, फिर आश्लेषा।
- योग शुद्ध
ब्रह्म — शुभ योग — 7:38 अपराह्न तक, फिर इन्द्र।
- करण शुद्ध
गर — चर करण, शुभ — 5:18 अपराह्न तक, फिर वणिज।
- विशेष शुभ योग शुद्ध
सर्वार्थ सिद्धि योग (6:52 पूर्वाह्न – 1:29 अपराह्न) · रवि पुष्य योग (6:52 पूर्वाह्न – 1:29 अपराह्न) · रवि योग (1:29 अपराह्न – कल, 6:52 पूर्वाह्न)।
- अशुभ योग शुद्ध
दग्ध या यमघंट योग नहीं।
- पंचक शुद्ध
पंचक नहीं।
- मास शुद्ध
कार्तिक मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।
दिन की समय-रेखा
- सर्वार्थ सिद्धि योग6:52 पूर्वाह्न – 1:29 अपराह्नसिद्ध योग
- रवि पुष्य योग6:52 पूर्वाह्न – 1:29 अपराह्नसिद्ध योग
- अमृत काल7:35 पूर्वाह्न – 9:11 पूर्वाह्नशुभ
- अभिजित मुहूर्त12:28 अपराह्न – 1:16 अपराह्नशुभ
- यमगंड12:52 अपराह्न – 2:22 अपराह्नसावधानी
- रवि योग1:29 अपराह्न – कल, 6:52 पूर्वाह्नसिद्ध योग
- गुलिक काल3:52 अपराह्न – 5:22 अपराह्नसावधानी
- राहुकाल5:22 अपराह्न – 6:53 अपराह्नत्याज्य
- वर्ज्यम्10:43 अपराह्न – कल, 12:19 पूर्वाह्नसावधानी
- भद्रा (पृथ्वी)कल, 4:17 पूर्वाह्न – कल, 6:52 पूर्वाह्नत्याज्य
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 5:16 पूर्वाह्न – कल, 6:04 पूर्वाह्नशुभ
- पुष्य → आश्लेषा1:29 अपराह्नपरिवर्तन
- ब्रह्म → इन्द्र7:38 अपराह्नपरिवर्तन
- षष्ठी → सप्तमीकल, 4:17 पूर्वाह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 6:52 पूर्वाह्न – 12:52 अपराह्न
- 2:22 अपराह्न – 3:52 अपराह्न