पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- योग दोष
व्यतीपात — महापात योग, शुभ कार्यों में पूर्णतः त्याज्य — कल, 1:59 पूर्वाह्न तक, फिर वरीयान।
- अशुभ योग सावधानी
दग्ध योग (वार-तिथि) — सर्वार्थ सिद्धि योग से परिहार।
- वार ध्यान दें
रविवार — राजकीय, चिकित्सा व अग्नि संबंधी कार्यों में शुभ; मांगलिक कार्यों में मध्यम।
- पंचक ध्यान दें
अग्नी पंचक चल रहा है — दक्षिण दिशा यात्रा, छत डालना, लकड़ी संग्रह आदि टालें।
- तिथि शुद्ध
शुक्ल द्वादशी (भद्रा) — शुभ तिथि। 7:26 पूर्वाह्न के बाद त्रयोदशी।
- नक्षत्र शुद्ध
रेवती — मृदु (मैत्र) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — 8:24 पूर्वाह्न तक, फिर अश्विनी।
- करण शुद्ध
बालव — चर करण, शुभ — 7:26 पूर्वाह्न तक, फिर कौलव।
- विशेष शुभ योग शुद्ध
सर्वार्थ सिद्धि योग (8:24 पूर्वाह्न – कल, 6:45 पूर्वाह्न)।
- भद्रा शुद्ध
आज भद्रा नहीं।
- मास शुद्ध
कार्तिक मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज का पंचांग शुभ कार्यों के आरंभ के लिए त्याज्य है। पूजा-पाठ, जप और दान कर सकते हैं; नए शुभ कार्य के लिए अगला शुद्ध दिन देखें।
दिन की समय-रेखा
- अमृत काल6:49 पूर्वाह्न – 7:42 पूर्वाह्नशुभ
- सर्वार्थ सिद्धि योग8:24 पूर्वाह्न – कल, 6:45 पूर्वाह्नसिद्ध योग
- अभिजित मुहूर्त12:26 अपराह्न – 1:14 अपराह्नशुभ
- यमगंड12:50 अपराह्न – 2:20 अपराह्नसावधानी
- गुलिक काल3:50 अपराह्न – 5:20 अपराह्नसावधानी
- राहुकाल5:20 अपराह्न – 6:51 अपराह्नत्याज्य
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 5:14 पूर्वाह्न – कल, 6:02 पूर्वाह्नशुभ
- द्वादशी → त्रयोदशी7:26 पूर्वाह्नपरिवर्तन
- रेवती → अश्विनी8:24 पूर्वाह्नपरिवर्तन
- व्यतीपात → वरीयानकल, 1:59 पूर्वाह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 6:49 पूर्वाह्न – 12:50 अपराह्न
- 2:20 अपराह्न – 3:50 अपराह्न