पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- तिथि सावधानी
शुक्ल चतुर्थी (रिक्ता) — शुभ कार्य आरंभ में त्याज्य। 10:55 पूर्वाह्न के बाद पंचमी — शुभ।
- वार सावधानी
शनिवार — क्रूर वार — विवाह, गृह-प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों में त्याज्य।
- योग सावधानी
वज्र — अशुभ योग, विशेषकर आरंभिक घटियाँ त्याज्य — 10:42 पूर्वाह्न तक, फिर सिद्धि।
- मास सावधानी
खरमास — विवाह, गृह-प्रवेश, मुंडन जैसे संस्कार वर्जित; पूजा-पाठ, दान शुभ।
- करण ध्यान दें
विष्टि — विष्टि (भद्रा) करण, भद्रा अनुभाग देखें — 10:55 पूर्वाह्न तक, फिर बव।
- पंचक ध्यान दें
मृत्यु पंचक चल रहा है — दक्षिण दिशा यात्रा, छत डालना, लकड़ी संग्रह आदि टालें।
- नक्षत्र शुद्ध
धनिष्ठा — चर (चल) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — 4:14 अपराह्न तक, फिर शतभिषा।
- विशेष शुभ योग शुद्ध
रवि योग (6:30 पूर्वाह्न – 4:14 अपराह्न)।
- अशुभ योग शुद्ध
दग्ध या यमघंट योग नहीं।
- भद्रा शुद्ध
भद्रा 6:31 पूर्वाह्न – 10:56 पूर्वाह्न स्वर्गलोक में — पृथ्वी पर दोष नहीं।
आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।
दिन की समय-रेखा
- गुलिक काल6:30 पूर्वाह्न – 7:50 पूर्वाह्नसावधानी
- रवि योग6:30 पूर्वाह्न – 4:14 अपराह्नसिद्ध योग
- राहुकाल9:11 पूर्वाह्न – 10:32 पूर्वाह्नत्याज्य
- अभिजित मुहूर्त11:29 पूर्वाह्न – 12:17 अपराह्नशुभ
- यमगंड1:13 अपराह्न – 2:34 अपराह्नसावधानी
- अमृत कालकल, 4:29 पूर्वाह्न – कल, 6:05 पूर्वाह्नशुभ
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 4:55 पूर्वाह्न – कल, 5:43 पूर्वाह्नशुभ
- वज्र → सिद्धि10:42 पूर्वाह्नपरिवर्तन
- चतुर्थी → पंचमी10:55 पूर्वाह्नपरिवर्तन
- धनिष्ठा → शतभिषा4:14 अपराह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 7:50 पूर्वाह्न – 9:11 पूर्वाह्न
- 10:32 पूर्वाह्न – 1:13 अपराह्न
- 2:34 अपराह्न – 5:16 अपराह्न