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पंचांग शुद्धि

दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में

01-11-2026 · रविवार · पुणे
सूर्योदय कालीन पंचांग के आधार पर

पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण

आश्विन कृष्ण सप्तमी · रविवारपुष्य नक्षत्र · साध्य योग · बव करण
सर्वोत्तम
  1. सर्वोत्तम
  2. उत्तम
  3. दोष युक्त
  4. वर्जित
  • वार ध्यान दें

    रविवार — राजकीय, चिकित्सा व अग्नि संबंधी कार्यों में शुभ; मांगलिक कार्यों में मध्यम।

  • तिथि शुद्ध

    कृष्ण सप्तमी (भद्रा) — शुभ तिथि। 2:52 अपराह्न के बाद अष्टमी।

  • नक्षत्र शुद्ध

    पुष्य — क्षिप्र (लघु) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — कल, 4:30 पूर्वाह्न तक, फिर आश्लेषा।

  • योग शुद्ध

    साध्य — शुभ योग — 2:39 अपराह्न तक, फिर शुभ।

  • करण शुद्ध

    बव — चर करण, शुभ — 2:52 अपराह्न तक, फिर बालव।

  • विशेष शुभ योग शुद्ध

    सर्वार्थ सिद्धि योग (6:35 पूर्वाह्न – कल, 4:30 पूर्वाह्न) · रवि पुष्य योग (6:35 पूर्वाह्न – कल, 4:30 पूर्वाह्न)।

  • अशुभ योग शुद्ध

    दग्ध या यमघंट योग नहीं।

  • भद्रा शुद्ध

    आज भद्रा नहीं।

  • पंचक शुद्ध

    पंचक नहीं।

  • मास शुद्ध

    आश्विन मास — खरमास या अधिक मास नहीं।

सरल निष्कर्ष

आज का पंचांग शुद्ध है और विशेष सिद्ध योग भी बन रहा है। नया कार्य, पूजा-अनुष्ठान, खरीदारी और अन्य शुभ कार्यों के लिए दिन अत्यंत अनुकूल है — राहुकाल आदि का समय छोड़कर।

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

दिन की समय-रेखा

  • सर्वार्थ सिद्धि योग6:35 पूर्वाह्न – कल, 4:30 पूर्वाह्नसिद्ध योग
  • रवि पुष्य योग6:35 पूर्वाह्न – कल, 4:30 पूर्वाह्नसिद्ध योग
  • अभिजित मुहूर्त11:53 पूर्वाह्न – 12:41 अपराह्नशुभ
  • यमगंड12:17 अपराह्न – 1:43 अपराह्नसावधानी
  • वर्ज्यम्1:17 अपराह्न – 2:53 अपराह्नसावधानी
  • गुलिक काल3:08 अपराह्न – 4:34 अपराह्नसावधानी
  • राहुकाल4:34 अपराह्न – 6:00 अपराह्नत्याज्य
  • अमृत कालकल, 3:25 पूर्वाह्न – कल, 5:01 पूर्वाह्नशुभ
  • ब्रह्म मुहूर्तकल, 4:59 पूर्वाह्न – कल, 5:47 पूर्वाह्नशुभ
  • साध्य → शुभ2:39 अपराह्नपरिवर्तन
  • सप्तमी → अष्टमी2:52 अपराह्नपरिवर्तन
  • पुष्य → आश्लेषाकल, 4:30 पूर्वाह्नपरिवर्तन

दिन के शुद्ध समय-खंड

सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।

  • 6:35 पूर्वाह्न – 12:17 अपराह्नसप्तमीअभिजितसिद्ध योग