पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- अशुभ योग सावधानी
दग्ध योग (वार-तिथि) — सर्वार्थ सिद्धि योग से परिहार।
- करण ध्यान दें
विष्टि — विष्टि (भद्रा) करण, भद्रा अनुभाग देखें — 3:37 अपराह्न तक, फिर बव।
- तिथि शुद्ध
कृष्ण तृतीया (जया) — शुभ तिथि। 3:37 अपराह्न के बाद चतुर्थी — रिक्ता।
- वार शुद्ध
बुधवार — सौम्य वार, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
- नक्षत्र शुद्ध
रोहिणी — ध्रुव (स्थिर) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — कल, 1:41 पूर्वाह्न तक, फिर मृगशिरा।
- योग शुद्ध
वरीयान — शुभ योग — 6:10 अपराह्न तक, फिर परिघ।
- विशेष शुभ योग शुद्ध
सर्वार्थ सिद्धि योग (7:23 पूर्वाह्न – कल, 7:24 पूर्वाह्न)।
- भद्रा शुद्ध
भद्रा 7:23 पूर्वाह्न – 3:37 अपराह्न स्वर्गलोक में — पृथ्वी पर दोष नहीं।
- पंचक शुद्ध
पंचक नहीं।
- मास शुद्ध
आश्विन मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।
दिन की समय-रेखा
- सर्वार्थ सिद्धि योग7:23 पूर्वाह्न – कल, 7:24 पूर्वाह्नसिद्ध योग
- यमगंड8:42 पूर्वाह्न – 10:01 पूर्वाह्नसावधानी
- गुलिक काल11:20 पूर्वाह्न – 12:39 अपराह्नसावधानी
- अभिजित (बुधवार को वर्जित)12:15 अपराह्न – 1:03 अपराह्नध्यान दें
- राहुकाल12:39 अपराह्न – 1:58 अपराह्नत्याज्य
- वर्ज्यम्6:26 अपराह्न – 8:02 अपराह्नसावधानी
- अमृत कालकल, 1:45 पूर्वाह्न – कल, 3:21 पूर्वाह्नशुभ
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 5:48 पूर्वाह्न – कल, 6:36 पूर्वाह्नशुभ
- तृतीया → चतुर्थी3:37 अपराह्नपरिवर्तन
- वरीयान → परिघ6:10 अपराह्नपरिवर्तन
- रोहिणी → मृगशिराकल, 1:41 पूर्वाह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 7:23 पूर्वाह्न – 8:42 पूर्वाह्न
- 10:01 पूर्वाह्न – 11:20 पूर्वाह्न
- 1:58 अपराह्न – 5:56 अपराह्न