पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- वार सावधानी
मंगलवार — क्रूर वार — विवाह, गृह-प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों में त्याज्य।
- भद्रा सावधानी
मृत्युलोक (पृथ्वी) की भद्रा 7:32 पूर्वाह्न – 11:48 पूर्वाह्न — इस अवधि में शुभ कार्य न करें।
- करण ध्यान दें
विष्टि — विष्टि (भद्रा) करण, भद्रा अनुभाग देखें — 11:47 पूर्वाह्न तक, फिर बव।
- तिथि शुद्ध
शुक्ल अष्टमी (जया) — शुभ तिथि। कल, 12:35 पूर्वाह्न के बाद नवमी — रिक्ता।
- नक्षत्र शुद्ध
धनिष्ठा — चर (चल) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — 11:04 अपराह्न तक, फिर शतभिषा।
- योग शुद्ध
ध्रुव — शुभ योग — कल, 2:35 पूर्वाह्न तक, फिर व्याघात।
- विशेष शुभ योग शुद्ध
रवि योग (11:04 अपराह्न – कल, 7:33 पूर्वाह्न)।
- अशुभ योग शुद्ध
दग्ध या यमघंट योग नहीं।
- पंचक शुद्ध
पंचक नहीं।
- मास शुद्ध
कार्तिक मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।
दिन की समय-रेखा
- भद्रा (पृथ्वी)7:32 पूर्वाह्न – 11:48 पूर्वाह्नत्याज्य
- यमगंड9:39 पूर्वाह्न – 10:44 पूर्वाह्नसावधानी
- अभिजित मुहूर्त11:24 पूर्वाह्न – 12:12 अपराह्नशुभ
- अमृत काल11:41 पूर्वाह्न – 1:17 अपराह्नशुभ
- गुलिक काल11:48 पूर्वाह्न – 12:52 अपराह्नसावधानी
- राहुकाल1:57 अपराह्न – 3:01 अपराह्नत्याज्य
- रवि योग11:04 अपराह्न – कल, 7:33 पूर्वाह्नसिद्ध योग
- वर्ज्यम्कल, 1:10 पूर्वाह्न – कल, 2:46 पूर्वाह्नसावधानी
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 5:57 पूर्वाह्न – कल, 6:45 पूर्वाह्नशुभ
- धनिष्ठा → शतभिषा11:04 अपराह्नपरिवर्तन
- अष्टमी → नवमीकल, 12:35 पूर्वाह्नपरिवर्तन
- ध्रुव → व्याघातकल, 2:35 पूर्वाह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 12:52 अपराह्न – 1:57 अपराह्न
- 3:01 अपराह्न – 4:06 अपराह्न