पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- तिथि सावधानी
कृष्ण चतुर्दशी (रिक्ता) — शुभ कार्य आरंभ में त्याज्य। 1:58 अपराह्न के बाद अमावस्या — वर्जित।
- वार ध्यान दें
रविवार — राजकीय, चिकित्सा व अग्नि संबंधी कार्यों में शुभ; मांगलिक कार्यों में मध्यम।
- करण ध्यान दें
शकुनि — स्थिर करण, सामान्य — 1:58 अपराह्न तक, फिर चतुष्पाद।
- विशेष शुभ योग ध्यान दें
आज सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि या रवि योग जैसा कोई विशेष योग नहीं।
- नक्षत्र शुद्ध
चित्रा — मृदु (मैत्र) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — 8:22 पूर्वाह्न तक, फिर स्वाति।
- योग शुद्ध
आयुष्मान — शुभ योग — कल, 5:32 पूर्वाह्न तक, फिर सौभाग्य।
- अशुभ योग शुद्ध
दग्ध या यमघंट योग नहीं।
- भद्रा शुद्ध
आज भद्रा नहीं।
- पंचक शुद्ध
पंचक नहीं।
- मास शुद्ध
आश्विन मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।
दिन की समय-रेखा
- अभिजित मुहूर्त12:32 अपराह्न – 1:20 अपराह्नशुभ
- यमगंड12:56 अपराह्न – 2:26 अपराह्नसावधानी
- वर्ज्यम्2:20 अपराह्न – 3:56 अपराह्नसावधानी
- गुलिक काल3:55 अपराह्न – 5:25 अपराह्नसावधानी
- राहुकाल5:25 अपराह्न – 6:55 अपराह्नत्याज्य
- अमृत कालकल, 1:40 पूर्वाह्न – कल, 3:16 पूर्वाह्नशुभ
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 5:22 पूर्वाह्न – कल, 6:10 पूर्वाह्नशुभ
- चित्रा → स्वाति8:22 पूर्वाह्नपरिवर्तन
- चतुर्दशी → अमावस्या1:58 अपराह्नपरिवर्तन
- आयुष्मान → सौभाग्यकल, 5:32 पूर्वाह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 6:58 पूर्वाह्न – 12:56 अपराह्न