पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- योग सावधानी
अतिगण्ड — अशुभ योग, विशेषकर आरंभिक घटियाँ त्याज्य — कल, 3:40 पूर्वाह्न तक, फिर सुकर्मा।
- तिथि शुद्ध
शुक्ल द्वितीया (भद्रा) — शुभ तिथि। 3:53 अपराह्न के बाद तृतीया।
- वार शुद्ध
बुधवार — सौम्य वार, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
- नक्षत्र शुद्ध
अनुराधा — मृदु (मैत्र) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — 11:38 पूर्वाह्न तक, फिर ज्येष्ठा।
- करण शुद्ध
कौलव — चर करण, शुभ — 3:53 अपराह्न तक, फिर तैतिल।
- विशेष शुभ योग शुद्ध
सर्वार्थ सिद्धि योग (6:39 पूर्वाह्न – 11:38 पूर्वाह्न) · अमृत सिद्धि योग (6:39 पूर्वाह्न – 11:38 पूर्वाह्न)।
- अशुभ योग शुद्ध
दग्ध या यमघंट योग नहीं।
- भद्रा शुद्ध
आज भद्रा नहीं।
- पंचक शुद्ध
पंचक नहीं।
- मास शुद्ध
कार्तिक मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।
दिन की समय-रेखा
- सर्वार्थ सिद्धि योग6:39 पूर्वाह्न – 11:38 पूर्वाह्नसिद्ध योग
- अमृत सिद्धि योग6:39 पूर्वाह्न – 11:38 पूर्वाह्नसिद्ध योग
- यमगंड7:59 पूर्वाह्न – 9:19 पूर्वाह्नसावधानी
- गुलिक काल10:40 पूर्वाह्न – 12:00 अपराह्नसावधानी
- अभिजित (बुधवार को वर्जित)11:36 पूर्वाह्न – 12:24 अपराह्नध्यान दें
- राहुकाल12:00 अपराह्न – 1:20 अपराह्नत्याज्य
- वर्ज्यम्5:52 अपराह्न – 7:28 अपराह्नसावधानी
- अमृत कालकल, 12:14 पूर्वाह्न – कल, 1:50 पूर्वाह्नशुभ
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 5:04 पूर्वाह्न – कल, 5:52 पूर्वाह्नशुभ
- अनुराधा → ज्येष्ठा11:38 पूर्वाह्नपरिवर्तन
- द्वितीया → तृतीया3:53 अपराह्नपरिवर्तन
- अतिगण्ड → सुकर्माकल, 3:40 पूर्वाह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 6:39 पूर्वाह्न – 7:59 पूर्वाह्न
- 9:19 पूर्वाह्न – 10:40 पूर्वाह्न
- 1:20 अपराह्न – 5:22 अपराह्न