पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- योग सावधानी
गण्ड — अशुभ योग, विशेषकर आरंभिक घटियाँ त्याज्य — 11:02 अपराह्न तक, फिर वृद्धि।
- भद्रा सावधानी
मृत्युलोक (पृथ्वी) की भद्रा कल, 1:06 पूर्वाह्न – कल, 6:21 पूर्वाह्न — इस अवधि में शुभ कार्य न करें।
- पंचक ध्यान दें
पंचक चल रहा है — दक्षिण दिशा यात्रा, छत डालना, लकड़ी संग्रह आदि टालें।
- तिथि शुद्ध
शुक्ल दशमी (पूर्णा) — शुभ तिथि। 12:42 अपराह्न के बाद एकादशी।
- वार शुद्ध
बुधवार — सौम्य वार, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
- नक्षत्र शुद्ध
धनिष्ठा — चर (चल) नक्षत्र, शुभ कार्यों में ग्राह्य — 6:17 अपराह्न तक, फिर शतभिषा।
- करण शुद्ध
गर — चर करण, शुभ — 12:42 अपराह्न तक, फिर वणिज।
- विशेष शुभ योग शुद्ध
रवि योग (6:20 पूर्वाह्न – 6:17 अपराह्न)।
- अशुभ योग शुद्ध
दग्ध या यमघंट योग नहीं।
- मास शुद्ध
आश्विन मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।
दिन की समय-रेखा
- रवि योग6:20 पूर्वाह्न – 6:17 अपराह्नसिद्ध योग
- अमृत काल7:08 पूर्वाह्न – 8:44 पूर्वाह्नशुभ
- यमगंड7:45 पूर्वाह्न – 9:11 पूर्वाह्नसावधानी
- गुलिक काल10:36 पूर्वाह्न – 12:02 अपराह्नसावधानी
- अभिजित (बुधवार को वर्जित)11:38 पूर्वाह्न – 12:26 अपराह्नध्यान दें
- राहुकाल12:02 अपराह्न – 1:28 अपराह्नत्याज्य
- भद्रा (पृथ्वी)कल, 1:06 पूर्वाह्न – कल, 6:21 पूर्वाह्नत्याज्य
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 4:45 पूर्वाह्न – कल, 5:33 पूर्वाह्नशुभ
- दशमी → एकादशी12:42 अपराह्नपरिवर्तन
- धनिष्ठा → शतभिषा6:17 अपराह्नपरिवर्तन
- गण्ड → वृद्धि11:02 अपराह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 6:20 पूर्वाह्न – 7:45 पूर्वाह्न
- 9:11 पूर्वाह्न – 10:36 पूर्वाह्न
- 1:28 अपराह्न – 5:45 अपराह्न