पंचांग शुद्धि
दिन के पाँचों अंग, विशेष योग, दोष और शुभ-अशुभ समय — एक नज़र में
पंचांग शुद्धि एवं विश्लेषण
- सर्वोत्तम
- उत्तम
- दोष युक्त
- वर्जित
- अशुभ योग सावधानी
दग्ध योग (वार-तिथि) — सर्वार्थ सिद्धि योग से परिहार।
- नक्षत्र ध्यान दें
कृत्तिका — मिश्र (साधारण) नक्षत्र, सामान्य कार्यों हेतु — 11:56 पूर्वाह्न तक, फिर रोहिणी।
- तिथि शुद्ध
कृष्ण तृतीया (जया) — शुभ तिथि। 11:37 अपराह्न के बाद चतुर्थी — रिक्ता।
- वार शुद्ध
बुधवार — सौम्य वार, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
- योग शुद्ध
वरीयान — शुभ योग — कल, 2:10 पूर्वाह्न तक, फिर परिघ।
- करण शुद्ध
वणिज — चर करण, शुभ — 1:07 अपराह्न तक, फिर विष्टि।
- विशेष शुभ योग शुद्ध
सर्वार्थ सिद्धि योग (6:27 पूर्वाह्न – कल, 6:28 पूर्वाह्न)।
- भद्रा शुद्ध
भद्रा 1:07 अपराह्न – 11:37 अपराह्न स्वर्गलोक में — पृथ्वी पर दोष नहीं।
- पंचक शुद्ध
पंचक नहीं।
- मास शुद्ध
आश्विन मास — खरमास या अधिक मास नहीं।
आज पंचांग में कुछ दोष हैं। दैनिक कार्य और पूजा-पाठ कर सकते हैं; विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए बेहतर दिन चुनें या आचार्य से परामर्श लें।
दिन की समय-रेखा
- सर्वार्थ सिद्धि योग6:27 पूर्वाह्न – कल, 6:28 पूर्वाह्नसिद्ध योग
- यमगंड7:51 पूर्वाह्न – 9:16 पूर्वाह्नसावधानी
- अमृत काल9:45 पूर्वाह्न – 11:21 पूर्वाह्नशुभ
- गुलिक काल10:40 पूर्वाह्न – 12:05 अपराह्नसावधानी
- अभिजित (बुधवार को वर्जित)11:41 पूर्वाह्न – 12:29 अपराह्नध्यान दें
- राहुकाल12:05 अपराह्न – 1:30 अपराह्नत्याज्य
- वर्ज्यम्कल, 1:03 पूर्वाह्न – कल, 2:39 पूर्वाह्नसावधानी
- ब्रह्म मुहूर्तकल, 4:52 पूर्वाह्न – कल, 5:40 पूर्वाह्नशुभ
- कृत्तिका → रोहिणी11:56 पूर्वाह्नपरिवर्तन
- तृतीया → चतुर्थी11:37 अपराह्नपरिवर्तन
- वरीयान → परिघकल, 2:10 पूर्वाह्नपरिवर्तन
दिन के शुद्ध समय-खंड
सूर्योदय से सूर्यास्त तक, राहुकाल, यमगंड, गुलिक, वर्ज्यम् और पृथ्वी की भद्रा छोड़कर (30 मिनट से लंबे)।
- 6:27 पूर्वाह्न – 7:51 पूर्वाह्न
- 9:16 पूर्वाह्न – 10:40 पूर्वाह्न
- 1:30 अपराह्न – 5:44 अपराह्न