DivyaKaal

दिव्य समय, शुभ जीवन

क्षणिक वैदिक चार्ट

लग्न कुंडलीएवं लग्न शुद्धि

चुने हुए समय पर लग्न और भावों में ग्रहों की सटीक स्थिति

लग्नमीन17°16'
जबलपुर2029-01-01 · 12:00
लाहिड़ी अयनांश · निरयन राशि
12मीन
1मेषशनि 10°10' ℞
2वृषभ
3मिथुनचंद्र 24°06'केतु 19°51' ℞
4कर्क
5सिंह
6कन्यामंगल 10°08'
7तुलागुरु 0°43'
8वृश्चिकशुक्र 27°09'
9धनुसूर्य 16°51'राहु 19°51' ℞
10मकरबुध 6°21'
11कुंभ
दिव्यकाल स्वचालित विश्लेषण

लग्न शुद्धि एवं विश्लेषण

मीन लग्न · 17°16'लग्नेश गुरु · 8वाँ भाव · अष्टम में ग्रह
दोष युक्त · परिहार सहित
  1. सर्वोत्तम
  2. उत्तम
  3. दोष युक्त
  4. वर्जित
  • अष्टम शुद्धि सावधानी

    8वें भाव में गुरु (शुभ ग्रह, अल्प दोष)।

  • लग्नेश सावधानी

    लग्नेश गुरु 8वें भाव में — दुःस्थान में।

  • ग्रह विन्यास सावधानी

    केंद्र/त्रिकोण में शुभ ग्रह: शुक्र · केंद्र में पाप ग्रह: सूर्य, मंगल, राहु, केतु।

  • गुरु दृष्टि ध्यान दें

    गुरु 8वें भाव में — लग्न पर गुरु की दृष्टि नहीं।

  • अंश / संधि शुद्ध

    17°16' — मध्य अंश, संधि या गंडांत दोष नहीं।

  • कर्तरी दोष शुद्ध

    पाप कर्तरी दोष नहीं।

  • चंद्र स्थिति शुद्ध

    चंद्र 4वें भाव में, बलवान (सूर्य से 173°)।

  • लग्न में ग्रह शुद्ध

    लग्न पाप ग्रहों से मुक्त।

सरल निष्कर्ष

लग्न में कुछ दोष हैं, पर उनका परिहार उपलब्ध है। सामान्य कार्य कर सकते हैं; बड़े संस्कार के लिए बेहतर लग्न देखें या आचार्य से परामर्श लें।

आचार्य हेतु — नियम और सीमाएँ
  • लग्न संधि: पहला या अंतिम 1° त्याज्य; जल-अग्नि राशि की संधि पर गंडांत। 28°–2° के पास सावधानी।
  • अष्टम शुद्धि: 8वाँ भाव खाली हो। पाप ग्रह हो तो दोष; स्वगृही/उच्च हो तो शमन।
  • पाप कर्तरी: 12वें और 2रे दोनों में पाप ग्रह। लग्न पर गुरु दृष्टि (गुरु 1/5/7/9 में) हो तो परिहार।
  • चंद्र: 6/8/12 भाव त्याज्य; 6/12 में गुरु केंद्र-त्रिकोण में हो तो परिहार। सूर्य से 72° से कम पर क्षीण।
  • लग्नेश केंद्र-त्रिकोण में शुभ; दुःस्थान में दोष, नीच हो तो त्याज्य।
  • शुभ ग्रह केंद्र-त्रिकोण में और पाप ग्रह 3/6/11 में शुभ; केंद्र (4/7/10) में पाप ग्रह दोष।

ध्यान दें: यह केवल लग्न शुद्धि है, पूर्ण मुहूर्त नहीं। शुभ मुहूर्त में तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, चंद्र-तारा बल, भद्रा और कार्य-विशेष के नियम भी देखे जाते हैं। यदि आप ज्योतिष के जानकार नहीं हैं, तो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले अपने पंडित या पुरोहित से परामर्श अवश्य करें, और इस लग्न शुद्धि को साथ रखकर शुद्ध एवं शुभ मुहूर्त निश्चित करें।

दिव्यकाल व्यक्तिगत शुभ मुहूर्तआपके कार्य, स्थान और जन्म राशि-नक्षत्र के अनुसार 40 से अधिक दोषों की जाँच, फिर आचार्य मंडल की समीक्षा। मुहूर्त 24 घंटे के भीतर।मुहूर्त अनुरोध करें

ग्रह स्थिति

☀️
सूर्यधनु (9) · 16°51'पूर्वाषाढ़ा · पद 2
🌙
चंद्रमिथुन (3) · 24°06'पुनर्वसु · पद 2सूर्य-दूरी: 172.75°
♂️
मंगलकन्या (6) · 10°08'हस्त · पद 1सूर्य-दूरी: 96.72°
☿
बुधमकर (10) · 6°21'उत्तराषाढ़ा · पद 3सूर्य-दूरी: 19.49°
♃
गुरुतुला (7) · 0°43'चित्रा · पद 3सूर्य-दूरी: 76.14°
♀️
शुक्रवृश्चिक (8) · 27°09'ज्येष्ठा · पद 4सूर्य-दूरी: 19.71°
♄
शनिमेष (1) · 10°10'अश्विनी · पद 4सूर्य-दूरी: 113.31°
℞ वक्री
☊
राहुधनु (9) · 19°51'पूर्वाषाढ़ा · पद 2
℞ वक्री
☋
केतुमिथुन (3) · 19°51'आर्द्रा · पद 4
℞ वक्री

चार्ट में अंक राशि संख्या हैं: मेष 1 से मीन 12। ℞ वक्री और † अंशगत अस्त दर्शाता है। शुक्र: मार्गी 10°, वक्री 8°; गुरु: 11° सूर्य-दूरी। स्थानानुसार तारा-अस्त/उदय की दृश्यता तिथियाँ अलग हो सकती हैं।