DivyaKaal

दिव्य समय, शुभ जीवन

क्षणिक वैदिक चार्ट

लग्न कुंडली

चुने हुए समय पर लग्न और भावों में ग्रहों की सटीक स्थिति

लग्नकुंभ21°00'
चेन्नई2026-12-11 · 12:00
लाहिड़ी अयनांश · निरयन राशि
11कुंभ
12मीनशनि 13°41'
1मेष
2वृषभ
3मिथुन
4कर्ककेतु 29°42' ℞
5सिंहमंगल 11°10'गुरु 2°47'
6कन्या
7तुलाशुक्र 10°38'
8वृश्चिकसूर्य 24°59'बुध 13°15' †
9धनुचंद्र 19°15'
10मकरराहु 29°42' ℞
दिव्यकाल स्वचालित विश्लेषण

लग्न शुद्धि एवं विश्लेषण

कुंभ लग्न · 21°00'लग्नेश शनि · 2वाँ भाव · अष्टम शुद्ध
दोष युक्त · परिहार सहित
  1. सर्वोत्तम
  2. उत्तम
  3. दोष युक्त
  4. वर्जित
  • कर्तरी दोष सावधानी

    पाप कर्तरी — 12वें में राहु, 2रे में शनि। गुरु की दृष्टि लग्न पर होने से परिहार।

  • ग्रह विन्यास सावधानी

    केंद्र/त्रिकोण में शुभ ग्रह: बुध, गुरु, शुक्र · केंद्र में पाप ग्रह: सूर्य, मंगल · 3/6/11 में पाप ग्रह (शुभ): केतु।

  • चंद्र स्थिति ध्यान दें

    चंद्र 11वें भाव में, पर क्षीण (सूर्य से 24°)।

  • लग्नेश ध्यान दें

    लग्नेश शनि 2वें भाव में — सामान्य स्थिति।

  • अंश / संधि शुद्ध

    21°00' — मध्य अंश, संधि या गंडांत दोष नहीं।

  • अष्टम शुद्धि शुद्ध

    8वाँ भाव खाली — अष्टम शुद्ध।

  • लग्न में ग्रह शुद्ध

    लग्न पाप ग्रहों से मुक्त।

  • गुरु दृष्टि शुद्ध

    गुरु 7वें भाव से लग्न को देख रहे हैं — अनेक दोषों का परिहार।

सरल निष्कर्ष

लग्न में कुछ दोष हैं, पर उनका परिहार उपलब्ध है। सामान्य कार्य कर सकते हैं; बड़े संस्कार के लिए बेहतर लग्न देखें या आचार्य से परामर्श लें।

आचार्य हेतु — नियम और सीमाएँ
  • लग्न संधि: पहला या अंतिम 1° त्याज्य; जल-अग्नि राशि की संधि पर गंडांत। 28°–2° के पास सावधानी।
  • अष्टम शुद्धि: 8वाँ भाव खाली हो। पाप ग्रह हो तो दोष; स्वगृही/उच्च हो तो शमन।
  • पाप कर्तरी: 12वें और 2रे दोनों में पाप ग्रह। लग्न पर गुरु दृष्टि (गुरु 1/5/7/9 में) हो तो परिहार।
  • चंद्र: 6/8/12 भाव त्याज्य; 6/12 में गुरु केंद्र-त्रिकोण में हो तो परिहार। सूर्य से 72° से कम पर क्षीण।
  • लग्नेश केंद्र-त्रिकोण में शुभ; दुःस्थान में दोष, नीच हो तो त्याज्य।
  • शुभ ग्रह केंद्र-त्रिकोण में और पाप ग्रह 3/6/11 में शुभ; केंद्र (4/7/10) में पाप ग्रह दोष।

ध्यान दें: यह केवल लग्न शुद्धि है, पूर्ण मुहूर्त नहीं। शुभ मुहूर्त में तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, चंद्र-तारा बल, भद्रा और कार्य-विशेष के नियम भी देखे जाते हैं। यदि आप ज्योतिष के जानकार नहीं हैं, तो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले अपने पंडित या पुरोहित से परामर्श अवश्य करें, और इस लग्न शुद्धि को साथ रखकर शुद्ध एवं शुभ मुहूर्त निश्चित करें।

दिव्यकाल व्यक्तिगत शुभ मुहूर्तआपके कार्य, स्थान और जन्म राशि-नक्षत्र के अनुसार 40 से अधिक दोषों की जाँच, फिर आचार्य मंडल की समीक्षा। मुहूर्त 24 घंटे के भीतर।मुहूर्त अनुरोध करें

ग्रह स्थिति

☀️
सूर्यवृश्चिक (8) · 24°59'ज्येष्ठा · पद 3
🌙
चंद्रधनु (9) · 19°15'पूर्वाषाढ़ा · पद 2सूर्य-दूरी: 24.27°
♂️
मंगलसिंह (5) · 11°10'मघा · पद 4सूर्य-दूरी: 103.81°
☿
बुधवृश्चिक (8) · 13°15'अनुराधा · पद 3सूर्य-दूरी: 11.73°
अंशगत अस्त
♃
गुरुसिंह (5) · 2°47'मघा · पद 1सूर्य-दूरी: 112.20°
♀️
शुक्रतुला (7) · 10°38'स्वाती · पद 2सूर्य-दूरी: 44.34°
♄
शनिमीन (12) · 13°41'उत्तराभाद्रपद · पद 4सूर्य-दूरी: 108.71°
☊
राहुमकर (10) · 29°42'धनिष्ठा · पद 2
℞ वक्री
☋
केतुकर्क (4) · 29°42'अश्लेषा · पद 4
℞ वक्री

चार्ट में अंक राशि संख्या हैं: मेष 1 से मीन 12। ℞ वक्री और † अंशगत अस्त दर्शाता है। शुक्र: मार्गी 10°, वक्री 8°; गुरु: 11° सूर्य-दूरी। स्थानानुसार तारा-अस्त/उदय की दृश्यता तिथियाँ अलग हो सकती हैं।